Aacharya chanakya Biography, आचार्य चाणक्य जीवन- परिचय , कौन थे

Aacharya chanakya Biography, आचार्य चाणक्य जीवन- परिचय , कौन थे

चाणक्य का जन्म

जिस समय चाणक्य का जन्म हुआ तो चणी को ऐसा महसूस हुआ, जैसे उनकी अंधेरी कोठरी में प्रकाश जगमगा गया है। पुत्र के जन्म पर चणी और उसकी पत्नी की खुशी का ठिकाना ना रहा। बालक ने उनके जीवन में खुशियां भर दे थी।

चणी और उसकी पत्नी दोनों ही सुंदर थे, परंतु चाणक्य श्याम रंग के उत्पन्न हुए थे। वह अपने माता पिता पर बिल्कुल नहीं गया था, लेकिन मां के लिए तो उनका प्रकाश बिखेरने वाला होता है। इस खुशी के मौके पर चणी ने अपने पुत्र के भविष्य रेखाओं के जानने के लिए एक परिचित ज्योतिषी के बुलाया। चाणक्य के मुंह में जन्म से ही 2 दांत निकला हुआ थे। जिस समय वाह मुस्कुराता था तो उसकी यही दांत चंदनी के सामान अपना प्रकाश फैला देते थे।

जब ज्योतिषी ने बालक के मुंह में दांत देखें तो उसकी नजर उसके हाथ की रेखाओ से हटकर दातों पर आकर टिक गई। ज्योतिषी अपने मन में एक बात सोचने लगा।
यह गरीब ब्राह्मण कितनी श्रद्धा से हमारा आतिथ्य कर रहा है। यह ठीक है, पर इसे अपने पुत्र के भविष्य का ज्ञान नहीं है कि पुत्र कितना भाग्यशाली है। ज्योतिषी के सोच में डूबा देखकर
चणी को आधीरता हुई। उसने कहा -

"आप कया सोचने लगे महात्मन ? कुछ मेरे पुत्र के भविष्य के बारे में बताओ।"

हे ब्राह्मण चणी ! तुम्हारे बालक के जन्म कुंडली और हाथ की रेखाएं जो बता रही है, उसके आधार पर यह बालक बड़ा होकर एक बहुत बड़े राज्य का मालिक होगा। यह आप कैसी बात कर रहे हैं महात्मान।चणी ने आचार्य से पूछा। तुम्हारा बालक के मुख में जो जन्म के दांत निकले हैं, भाई साहब बालक तो शताब्दियों के बाद किसी भाग्यशाली के घर जन्म लेता है। ज्योति सेन ने बताया।

आप सोच कह रहे हैं महात्मन। हां चणी! सुख इस बालक के चारों तरफ नर्तन करेगा। राजा न होकर भी याह राजा निर्माता बनेगा। ज्योतिषी ने कहा स्वर कहा।

ज्योतिषी अपनी भविष्यवाणी कर रहा था, जब की चणी खुश होने के बजाय संकोच में डूबा जा रहा था। उसे डर था की कहीं कोई राजा का सैनिक न सुन ले और उसके पुत्र की जान के कोई खतरा उत्पन्न ना हो जाए।
इस आशंका में चणी का मन अंदर ही अंदर कहां पर था। उसे ज्योतिषी की बात सुनकर जरा सा भी खुशी नहीं हो रही थी कि उसका बेटा राज्य निर्माता बनेगा। वह तो सोच रहा था अगर नन्द के सैनिकों को सुराग लग गया तो बा उनके पूरे परिवार के मौत के घाट उतारबा देंगे। चणी ने काफी सोच विचार के बाद अपने पुत्र के समय के दांत तोड़ दिए।

Aacharya chanakya Biography, आचार्य चाणक्य जीवन- परिचय , कौन थे

  • जन्म - अनुमानतः ईसापूर्व 375
  • मृत्यु - अनुमानतः ईसापूर्व 283
  • आवास - पाटलिपुत्र
  • शिक्षा प्राप्त - तक्षशिला
  • व्यवसाय चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री

चाणक्य के माता पिता

इनका निवास स्थान मगध के गांव कुसुमपुर में था। आचार्य चाणक्य के पिता का नाम चणी थे। बा एक गरीब ब्राह्मण थे। बह एकदम संतोष की मूर्ति व नितांत धर्म निष्ठ लगाते थे। उन्होंने न तो कभी धन की इच्छा की थी और न ही कभी अधिक सुख की लालसा। वे अपने कर्मकाण्ड के कार्य और परिवार मैं सुख का अनुभव करते थे। इससे ज्यादा उन्होंने कभी कुछ सोचा ही नहीं।

चाणक्य से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ

  • चाणक्य के द्वारा अर्थशास्त्र, राजनीति शास्त्र, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि महान ग्रंन्थ रचित है। जिसके चलते अर्थशास्त्र को मौर्यकालीन भारतीय समाज का दर्पण माना जाता है।

  • चाणक्य तक्षशिला (वर्तमान में रावलपिंडी, पाकिस्तान) के निवासी थे और राजसी ठाट-बाट से दूर एक छोटी सी कुटिया में रहते थे।

  • चाणक्य के पिता एक गरीब ब्राह्मण थे और किसी तरह अपना गुजर-बसर करने के लिए छोटा-मोटा कार्य करते थे। जिसके चलते चाणक्य का बचपन बहुत गरीबी और दिक्कतों में गुजरा।

  • कई विद्वानों के मतानुसार यह कहा जाता है कि वह बड़े ही स्वाभिमानी एवं क्रोधी स्वभाव के व्यक्ति थे।

  • उन्होंने उस समय के महान शिक्षा केंद्र तक्षशिला से शिक्षण प्राप्त किया था।

  • विभिन्न स्त्रोतों के अनुसार यह माना जाता है कि एक बार मगध के राजा महानंद ने श्राद्ध के अवसर पर चाणक्य को बुलाया और अपमानित किया। जिसके चलते चाणक्य ने क्रोध में वशीभूत होकर अपनी शिखा (बालों की चोटी) खोलकर यह प्रतिज्ञा ली, कि जब तक वह नंदवंश का नाश नहीं कर देंगे, तब तक वह अपनी शिखा नहीं बाँधेंगे।

  • नंदवंश के विनाश के बाद उन्होंने चन्द्रगुप्त मौर्य को राजगद्दी का उत्तरदायित्व सौंपा। उसके बाद मौर्य साम्राज्य का विस्तार करने के उद्देश्य से चाणक्य ने व्यावहारिक राजनीति में प्रवेश किया और चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री बने। 


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