चाणक्य इन्द्रिय का सूत्र। Acharya chanakya sutra in Hindi

इन्द्रियों पर विजय विनय के द्वारा प्राप्त की जा सकती है। यही इंद्रिय पर विजय पाने का मुख्य साधन है।

जो मनुष्य शासकोचित सत्य व्यवहार करना सीख लेते हैं वही जितेन्द्रीय होते हैं।

चाणक्य इन्द्रिय का सूत्र। Acharya chanakya sutra in Hindi


इन्द्रियों के शांत रखने वाली शक्ति ही शास्त्र है।

इन्द्रियों पर विजय पाने के लिए शास्त्र का ज्ञान होना आवश्यक हे। शास्त्र ही इन्द्रियों को वश में करने के लिए मनुष्य को प्रोत्साहित करता है। अज्ञानी लोग अपनी इन्द्रियों पर काबू नहीं पा सकते, जिस कारण उन्हों अनेकों कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और वह आपने जीवन के सफल बनाने में असमर्थ रहते हैं

जितात्मा नीतिमान लोग सभी संपत्तियों मुझे से सम्पन्न होकर रहते हैं।

इन्द्रियों का आज्ञाकारी असंयतेन्द्रिय  राजा समस्त प्रकार की सेनाओं से सुसज्जित होने पर भी नष्ट हो जाता है।

मनुष्य काम क्रोध आदि विकारों की अधीनता स्वीकार करके अपने चरित्र के विपरीत कोई ऐसा काम न कर बैठे कि वह जीवन भर हृदय में चुभने वाला कांटा बन जाये।


पतिव्रता ही पत्नी है

पत्नी वही है जो अन्दर और बाहर से पवित्र हो, जो कर्म करने में कुशल और अत्यन्त चतुर है। वही पत्नी उत्तम है, जो पतिव्रता है। वही पत्नी श्रेष्ठ है, जिसे पति प्रेम करता है अथवा जो पति से प्रेम रखती है, वस्तुत: वही पत्नी है जो सत्य वचन है!

इन्द्रियों का मर्यदाहीना उपयोग मनुष्य के समय से पहले वाधऺक्य के अधीन कर देता है। प्रकृति योग्य प्रबन्धक और विजेता बनकर आत्मप्रसाद लाभ करने के लिए मिली है।इन्द्रियों भी उसी प्रकृति का भाग है । दो प्रकार मनुष्य होते हैं --एक वे जो प्रकृति पर अपना बश रखते हैं, दूसरे वे जो अपनी प्रकृति के अधीनता मैं उसके गुलाब बनकर रहते हैं। यह तो मनुष्य अपनी शक्तियों के स्वामी बन कर रहे या अपनी शक्तियों की दास्ता स्वीकार करके रहे ।


अवैध कार्य करने की भावना अपने पर शास्त्रांकुश उसे रोक देता है ।

स्त्री सम्बन्धी भोग का बन्धन सम्मुख आने पर उससे अपने के बच्चा सतना असाधारण मनोबल और तपस्या का काम है



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