महाभारत में कैसे। गांधारी ने त्राटक के द्वारा अपने पुत्र का शरीर वज्र जैसा बना दिया

महाभारत की बात है जब महाभारत युद्ध हो रहा था कौरव एक-एक करके मारे जा रहे थे। युद्ध के अंतिम समय में जब कौरवों में सिर्फ दुर्योधन ही रह गया था। तब अपने माता गांधारी से युद्ध में विजय प्राप्त हो , इसका आशीर्वाद लेने के लिये अपने घर में गया।

महाभारत में कैसे। गांधारी ने त्राटक के द्वारा अपने पुत्र का शरीर वज्र जैसा बना दिया

उसने, माता गांधारी से प्रार्थना की -माता मुझे युद्ध में विजय प्राप्त हो, ऐसा आशीर्वाद दें। उसके माता गांधारी ने आशीर्वाद देने से तो इंकार कर दिया, मगर पुत्र मोह में आकर गंधारी ने कहां -मैं तुम्हें आशीर्वाद  तो नहीं दूंगी, हां तुम्हें ऐसा सुरक्षा कवच दे सकती हूं जिसमें तुम्हारा शरीर बज्र के सामान हो जायेगा। इसके लिए दुर्योधन तैयार हो गया। गंधारी बोली -पहले तुम गंगा स्नान करके निर्वस्त्र अवस्था में आओ फिर मैं तुम्हें कवच प्रदान करूंगी। 

दुर्योधन गंगा  में स्नान करने के लिए चल दिया। स्नान करके वापस आते समय रास्ते में भगवान श्री कृष्णा जी मिल गये, श्री कृष्णा जी तो सब कुछ जानते थे। श्री कृष्णा जी देखते ही दुर्योधन नग्नावस्था के कारण झिझक गया। श्री कृष्णा जी ने पूछा - इस समय ऐसी अवस्था में कहां जा रहे हो। दुर्योधन बोला- माता के पास जा रहा हूं। श्री कृष्णा जी बोले- माता के पास नग्नावस्था में जा रहे हो। अव तुम बच्चे नहीं हो, युवावस्था वाले हो, क्या उचित है ऐसी अवस्था

मैं जाना। इतना कह कर श्री कृष्णा जी चले गए। दुर्योधन ने सोचा-सच है, ऐसी अवस्था में नहीं आना चाहिए। दुर्योधन ने कुछ सोच कर शरीर के मध्य भाग में एक छोटा सा वस्त्र पहन लिया, और माता के पास पहुंच गया। दुर्योधन अपनी माता गांधारी से बोला-माता आपकी आज्ञानुसार गंगा स्नान करके आ गया हूं। गंधारी ने कहा-मेरे सामने खड़े हो जाओ। दुर्योधन सामने खड़ा हो गया। गंधारी सदैव अपने आंखों पर पट्टी चड़ाये रखती थी। 

वह शिव भकतनी, पतिव्रता कठोर संयम करने वाले थी, इसीलिए वह योगवल से युक्त थी, मगर पुत्र मोह मैं सबकुछ ऐसा कर रही थी। कई वर्षों से आंखों पर बांधु पट्टी को उसने दुर्योधन के सामने खोल दिया, फिर गांधारी ने त्राटक करते हुए सारा योगबल आंखों द्वारा निकालकर दुर्योधन का शरीर वज्र के समान बना दिया। मगर जिस स्थान पर दुर्योधन ने वस्त्र पहन रखा था, वही स्थान कमजोर रह गया अर्थात वज्र के समान नहीं हुआ। अर्थात श्री कृष्णा जी की नीति काम कर गई।

इस घटना में महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस गांधारी ने कठोर संयम के द्वारा व भक्ति के द्वारा योगबल एकत्र किया था अथवा प्राप्त किया था, उसी ने पुत्र मोह में आकर अधर्मी पुत्र पर प्रयोग कर दिया। फिर भी गांधारी की इच्छा पूर्ण न हो सकी क्योंकि दुर्योधन का शरीर पूर्ण रूप से वज्र के समान नहीं हो पाया था। प्रयोगकर्ता को सदैव धर्म- अधर्म का निर्णय करके ही इस प्रकार की शक्ति का प्रयोग करना चाहिए, नहीं तो शक्ति का दुरुपयोग ही कहा जाएगा।

Website- https://www.lifebazar.in/

FB page - https://www.facebook.com/Life-Bazar-103245668035805/

Instagram- https://www.instagram.com/p/CFQ7sQkjJ-h/?igshid=gz68d1fb3tpu

WhatsApp- https://wa.me/message/XXQUBC4HDIBPI1





2 टिप्पणियां

टिप्पणी पोस्ट करें
नया पेज पुराने