महाभारत काल का हस्तिनापुर कहा है। hastinapur biography, history in hindi

 

महाभारत काल का हस्तिनापुर कहा है। hastinapur biography,  history in hindi

हस्तिनापुर उत्तर प्रदेश में मेरठ लगभग 40 km दुर प्राचीन नदी गंगा किनारे प प्रस्तित है। इस नगर के महाराज हस्तिन द्वारा  निर्माण किया गया था, इसलिए हस्तिनापुर कहा जाता है हस्तिन के बाद कई वंशों ने हस्तिनापुर पर राज किया। उन्ही वंशों में एक कुरु के वंश में ही शांतनु और उनके पौत्र पांडु तथा धृतराष्ट्र हुए, जिनके पुत्र पाण्डव और कौरव कहलाए।


पुरातत्वों के उत्खनन से ज्ञात होता है कि हस्तिनापुर की प्राचीन बस्ती लगभग 1000 ईसा पूर्व से पहले की थी और यह कई सदियों तक स्थित रही। दूसरी बस्ती लगभग 90 ईसा पूर्व में बसाई गई थी, जो 300 ईसा पूर्व तक रही। तीसरी बस्ती 200 ई.पू. से लगभग 200 ईस्वी तक विद्धमान थी और अंतिम बस्ती 11वीं से 14वीं शती तक विद्यमान रही। अब यहां कहीं कहीं बस्ती के अवशेष हैं और प्राचीन हस्तिनापुर के अवशेष भी बिखरे पड़े हैं। वहां भूमि में दफन पांडवों का विशालकाय एक किला भी है जो देखरेख के अभाव में नष्ट होता जा रहा है। इस किले के अंदर ही महल, मंदिर और अन्य इमारते हैं।


हस्तिनापुर के मशहूर पर्यटक स्थल -

हस्तिनापुर में हिन्दू और जैन धर्म के पवित्र स्थल पाए जातें है। यहाँ के मशहूर स्थल जैसे पांडेश्वर मंदिर, करण मंदिर और कमल मंदिर भी शामिल है। जैन लोगों के लिए इस जगह में दिगम्बर जैन का बहुत बड़ा मंदिर है। जहा दूर-दूर से लोग घूमने के लिए आते हैं। मंदिरों के आलावा यहाँ कैलाश पर्वत, अष्टपथ  और हस्तिनापुर वन्यजीव भी है जिसे 1986 में स्थापित किया गया है। 


दिगंबर जैन मंदिर. 

मनोरम दृश्यों से समृद्ध एक पहाड़ी पर बने इस मंदिर में भगवान शांतिनाथ की मूर्ति स्थापित है। मंदिर में प्रार्थना के लिए जैन अनुयायियों के साथ-साथ अन्य धर्मों के लोग भी बड़े ही श्रद्धा भाव से यहां आते हैं। आस्थावान जन यहां प्रार्थना करने के साथ-साथ पद्मासन मुद्रा में भगवान की मूर्ति के सामने भी सिर झुकाते हैं। 


पांडेश्वर महादेव मंदिर

हस्तिना पूर में पांडव किले के पास पांडेश्वर महादेव मंदिर आज भी परस्थित है, पांडेश्वर महादेव मंदिर यह मंदिर पांडवों की रानी द्रोपति पूजा किया करती थी। इस मंदिर में शिवलिंग और पांच पांडव मूर्ति महाभारत कल से बताया जाता है अंदाजा से लगाया जा सकता है यह मंदिर और शिवलिंग प्रकृति है।

यह मंदिर जल अभिषेक के कारण आधा रह गया है मंदिर के पास एक विशाल वट का वृक्ष है । यह  प्राचीनकाल से विद्यमान है। राम मंदिर के पास एक शीतल जल के कुआं आज भी स्थित है।

यह पांडेश्वर मंदिर देश-विदेश में प्रसिद्ध है मंदिर के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं ।

और शिवरात्रि के दिन विशाल मेला आयोजित किया जाता है


विदुर के किला

हस्तिनापुर हस्तिनापुर में गंगा किनारे विदुर के किला प्रस्तित है इस किला विदुर के निवास स्थान कहा जाता है। विदुर पांडव धृतराष्ट्र के सौतेला भाई है। विदुर अपने व्यवहार और राजनीति के कारण प्रसिद्ध है इसके अलावा धृतराष्ट्र के प्रधानमंत्री थे। आज इस किला के आनंद और चमत्कारी के लिए जाना जाता है


हस्तिनापुर में कर्ण मंदिर 

ऐसा माना जाता है कि हस्तिनापुर में कर्ण मंदिर महाभारत के समय में बनाया गया था। यह भगवान शिव को समर्पित था। इसके अंदरूनी हिस्से में एक शिव लिंगम है, जो किंवदंतियों के अनुसार, महाभारत के सबसे महान नायकों में से एक, दान वीर कर्ण द्वारा प्रदान किया गया था।

महाभारत का महाकाव्य कर्ण की उदारता और वीरता की कई कहानियों से परिपूर्ण है। मंदिर पुरानी गंगा नदी के किनारे एक टीले पर स्थित है। हालांकि एक छोटी सी लगभग एक कमरे की संरचना, यह बड़ी संख्या में भक्तों, तीर्थयात्रियों और आगंतुकों को साल भर खींचता है।

भगवान शिव सूर्यपुत्र दानवीर कर्ण की पूजा करने के बाद इस मंदिर में प्रतिदिन सावन के सोने का दान करते हैं। ऐसा माना जाता है कि पास में ही देवी का मंदिर था। जो मंदिर कर्ण को सोना देता था, आज वह मंदिर विलुप्त हो गया है या धरती में समा गया है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा स्वतंत्रता के बाद हस्तिनापुर का पुनर्विकास किया गया था। इसके तहत राज्य सरकार की मदद से मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया।

आज का कर्ण मंदिर बुद्ध गंगा के पुल के पास स्थित है। ऐसा माना जाता है कि महाभारत काल में गंगाजी इसी घाट से होकर गुजरती थीं। गंगा जी का प्रवाह इस स्थान से दूर होने के कारण अब इस विलुप्त धारा को बुधि गंगाजी के नाम से जाना जाने लगा है।

कर्ण ने अपना कवच और कुंडल इंद्र को दान कर दिया। वह विश्व प्रसिद्ध आयोजन भी इसी स्थान पर हुआ था।


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