पशुपतिनाथ मंदिर का इतिहास | pashupatinath mandir Nepal history in hindi

पशुपतिनाथ मंदिर सिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक केदारनाथ मंदिर आधा भाग माना जाता है यह मंदिर नेपाल के राजधानी काठमांडू से 3 किलोमीटर उत्तर पश्चिम के देवपाटन गांव में बागमती नदी के किनारे स्थित है।

पशुपतिनाथ मंदिर का इतिहास | pashupatinath mandir  Nepal history in hindi

यह पावन भूमि आध्यात्मिक पावन सुगंधित से जगमगाए उठा है पूरी तरह से जिंदगी अध्यात्मिक पहलुओं से जुड़ी है नेपाल के यह पशुपति मंदिर जिसमें माना जाता है आज भी इसमें महादेव विराजमान है

आमतौर पर शिव मंदिर मैं एक मुख वाला शिवलिंग देखा जाता है लेकिन पशुपति नाथ मंदिर में विराजमान शिवलिंग एक नहीं बल्कि पांच मुख बाला शिवलिंग हे 

मंदिर में भगवान शिव की एक पांच मुंह वाली मूर्ति है। पशुपतिनाथ विग्रह में चारों दिशाओं में एक मुख और एकमुख ऊपर की ओर है। प्रत्येक मुख के दाएं हाथ में रुद्राक्ष की माला और बाएं हाथ में कमंदल मौजूद है। मान्यता अनुसार पशुपतिनाथ मंदिर का ज्योतिर्लिंग पारस पत्थर के समान है।

कहते हैं कि ये पांचों मुंह अलग-अलग दिशा और गुणों का परिचय देते हैं। पूर्व दिशा की ओर वाले मुख को तत्पुरुष और पश्चिम की ओर वाले मुख को सद्ज्योत कहते हैं। उत्तर दिशा की ओर वाले मुख को वामवेद या अर्धनारीश्वर कहते हैं और दक्षिण दिशा वाले मुख को अघोरा कहते हैं। जो मुख ऊपर की ओर है उसे ईशान मुख कहा जाता है।


पशुपतिनाथ मंदिर का इतिहास

किंवदंतियों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण सोमदेव राजवंश के पशुप्रेक्ष ने तीसरी सदी ईसा पूर्व में कराया था किंतु उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेज़ 13वीं शताब्दी के ही हैं। इस मंदिर की कई नकलों का भी निर्माण हुआ है जिनमें भक्तपुर (1480), ललितपुर (1566) और बनारस (19वीं शताब्दी के प्रारंभ में) शामिल हैं। मूल मंदिर कई बार नष्ट हुआ। इसे वर्तमान स्वरूप नरेश भूपतेंद्र मल्ल ने 1697 में प्रदान किया।

पशुपतिनाथ मंदिर ने अपनी संपत्ति का खुलासा पहली बार किया है। जिसमें मंदिर के पास 9.276 किलोग्राम सोना, 316 किलोग्राम चांदी और 120 करोड़ रुपए की नकदी है। मंदिर की संपत्ति के बारे में यह खुलासा मंदिर की संपत्ति का आकलन करने के लिए बनाई गई एक समिति ने किया है।

पशुपतिनाथ एरिया डेवलपमेंट ट्रस्ट की ओर से गठित एक समिति के अनुसार सोने और चांदी की यह संपत्ति 1962 से 2018 के बीच की है। न्यास के कार्यकारी निदेशक रमेश उप्रेति को काठमांडू पोस्ट ने यह कहते हुए उद्धृत किया, ” पहली बार हम पशुपतिनाथ एरिया डेवलपमेंट ट्रस्ट की संपत्ति को सार्वजनिक कर रहे हैं। मंदिर के पास कई सारे बैंकों में 120 करोड़ रुपये नकद, 9.276 किलोग्राम सोना, 316.58 किलोग्राम चांदी और 186 हेक्टेयर जमीन की संपत्ति है।


पशुपति का अर्थ :

पशु अर्थात जीव या प्राणी और पति का अर्थ है स्वामी और नाथ का अर्थ है मालिक या भगवान। इसका मतलब यह कि संसार के समस्त जीवों के स्वामी या भगवान हैं पशुपतिनाथ। दूसरे अर्थों में पशुपतिनाथ का अर्थ है जीवन का मालिक।


पौराणिक कथा

1. एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव यहां पर चिंकारे का रूप धारण कर निद्रा में चले बैठे थे। जब देवताओं ने उन्हें खोजा और उन्हें वाराणसी वापस लाने का प्रयास किया तो उन्होंने नदी के दूसरे किनारे पर छलांग लगा दी। कहा जाता हैं इस दौरान उनका सींग चार टुकडों में टूट गया था। इसके बाद भगवान पशुपति चतुर्मुख लिंग के रूप में यहां प्रकट हुए थे।

2.दूसरी कथा एक चरवाहे से जुड़ी है। कहते हैं कि इस शिवलिंग को एक चरवाहे द्वारा खोजा गया था जिसकी गाय का अपने दूध से अभिषेक कर शिवलिंग के स्थान का पता लगाया था।

3.तीसरी कथा भारत के उत्तराखंड राज्य से जुडी एक पौराणिक कथा से है। इस कथा के अनुसार इस मंदिर का संबंध केदारनाथ मंदिर से है। कहा जाता है जब पांडवों को स्वर्गप्रयाण के समय शिवजी ने भैंसे के स्वरूप में दर्शन दिए थे जो बाद में धरती में समा गए लेकिन पूर्णतः समाने से पूर्व भीम ने उनकी पुंछ पकड़ ली थी। जिस स्थान पर भीम ने इस कार्य को किया था उसे वर्तमान में केदारनाथ धाम के नाम से जाना जाता है। एवं जिस स्थान पर उनका मुख धरती से बाहर आया उसे पशुपतिनाथ कहा जाता है। पुराणों में पंचकेदार की कथा नाम से इस कथा का विस्तार से उल्लेख मिलता है।


मंदिर दर्शन की मान्यता :

पशुपतिनाथ मंदिर के संबंध में यह मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस स्थान के दर्शन करता है उसे किसी भी जन्म में फिर कभी पशु योनि प्राप्त नहीं होती है। हालांकि शर्त यह है कि पहले शिवलिंग के पहले नंदी के दर्शन ना करे। यदि वो ऐसा करता है तो फिर अलगे जन्म में उसे पशु बनना पड़ता है। मंदिर की महिमा के बारे में आसपास के लोगों से आप काफी कहानियां भी सुन सकते हैं। मंदिर में अगर कोई घंटा-आधा घंटा ध्यान करता है तो वह जीव कई प्रकार की समस्याओं से मुक्त भी हो जाता है।


पशुपतिनाथ मंदिर में मनाने जानेवाले त्यौहार

इस मंदिर में साल भर त्यौहार मनाये जाते है और हर साल भक्त हजारों की संख्या से भगवान के दर्शन के लिए आते है। इस मंदिर में महा शिवरात्रि, चतुर्थी और तीज का त्यौहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इन त्यौहार के दौरान सभी भक्त बड़ी संख्या आते है और भगवान के दर्शन लेते है।

इस मंदिर से कई सारी अद्भुत बाते जुडी है। ऐसा कहा जाता है की जो भक्त इस मंदिर में भगवान के दर्शन के दौरान मर जाता है तो उसे फिर से मनुष्य का ही जन्म मिलता है, फिर चाहे उसने अपने जिन्दगी में कितने भी बुरे कर्म किये हो। इस मंदिर के चारो और केवल साधू ही दिखते है। यहाँ के सभी साधू में एक खास है, वो यह है की सभी साधू गुफा में रहते है। इस मंदिर की एक और खास बात यह है की मंदिर के बाजु में बागमती नदी के किनारे लोगो पर अंतिम संस्कार किया जाता है और उनकी अस्थिया इसी नदी में बहाई जाती है।



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