रजिया सुल्तान कौन थी, जीवन परिचय । Who was Razia Sultan, life introduction in Hindi

भारत में उस समय सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक था।जिसकी मृत्यु 1210 मैं लोहार में चौगान खेलते हुई औरों से गिरने की वजह से हुई। उसकी मृत्यु के बाद उसके बेटे आरामशाह को राजगद्दी मिली। वह अनेक बुरी आदतों का शिकार और अत्याचारी शासक था। उसमें शासन करने की क्षमता भी नहीं था। इसलिए कुछ शासकों ने उसे अपना बादशाह मानने से इन्कार कर दिया।वह योग्य शासक नहीं था। सभी शक्तिशाली शासकों तथा सरदारों ने कुतुबुद्दीन ऐबक के दामाद इल्लतुतमिश को बुलाकर अपना इरादा बताया कि वे सभी उसे दिल्ली का सुल्तान बन्ना चाहते हैं।इल्लतुतमिश तैयार हो गए। और उन्होंने आरामशाह से युद्ध की घोषणा कर दी।

रजिया सुल्तान कौन थी, जीवन परिचय । Who was Razia Sultan, life introduction in Hindi

भारत में उस समय सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक था।जिसकी मृत्यु 1210 मैं लोहार में चौगान खेलते हुई औरों से गिरने की वजह से हुई। उसकी मृत्यु के बाद उसके बेटे आरामशाह को राजगद्दी मिली। वह अनेक बुरी आदतों का शिकार और अत्याचारी शासक था। उसमें शासन करने की क्षमता भी नहीं था। इसलिए कुछ शासकों ने उसे अपना बादशाह मानने से इन्कार कर दिया।वह योग्य शासक नहीं था। सभी शक्तिशाली शासकों तथा सरदारों ने कुतुबुद्दीन ऐबक के दामाद इल्लतुतमिश को बुलाकर अपना इरादा बताया कि वे सभी उसे दिल्ली का सुल्तान बन्ना चाहते हैं।इल्लतुतमिश तैयार हो गए। और उन्होंने आरामशाह से युद्ध की घोषणा कर दी।

वह सुलतान बन गए, परंतु अनको अनेक परेशानियां ने घेर लिया। कुछ सरदार खुद राजा बनने के सपने देखते थे। उन्होंने इनका विरोध किया, परंतु सुल्तान अपनी प्रत्येक परेशानियों पर विजय प्राप्त की और समस्याओं को सुलझाने में सफल हो गए। धीरे-धीरे उन्होंने अपने राज्य का विस्तार भी किया। पंजाब पर विजय प्राप्त करके उसे अपने राज्य में मिला लिया। अपनी राजधानी दिल्ली में बनाई। उनका मंत्री बलवान बड़ा ही स्वामी भक्त तथा विश्वासपात्र था।

इल्लतुतमिश के पुत्र विलास में डूबे रहते था। वे शासन करने योग्य नहीं था, उनकी बड़ी बेटी राजिया बड़ी चतुर, साहसी और योग्य स्त्री थी। इसे इल्लतुतमिश ने घुड़सवारी, तीरंदाज़ी तथा शस्त्र चलाने की शिक्षा दिलाई थी। इल्लतुतमिश के पुत्रों में नसीरुद्दीन महमूद भी सबसे योग्य था। अतः उन्होंने उसी को अपना उत्तराधिकारी बनाना उचित समझा था, परन्तु 1229 में उसकी मृत्यु हो गई। अब अन्य निकम्मे पुत्रों को देखते हुए समस्या खड़ी हुई की उनके बाद उत्तराधिकारी कौन रहेगा। 

उन्होंने फैसला किया की सभी शासकीय गुणों में निपुण होने के कारण वह अपनी बड़ी पुत्री राजिया को राज्य की बागडोर सौंपेंगे। वह जानते थे कि समय पड़ने पर अपनी सेना का संचालन भी वह कुशलतापूर्वक कर सकती थी। उन्हें लगता था कि उनके खून पसीने से सींची रियासत की यदि कोई जिम्मेदारी निभा सकता है, तो वह राजिया ही है। उन्होंने गुप्त रूप से एक वसीयतनामा तैयार कराया, जिसमें अपना उत्तराधिकारी राजिया को ही बनाया और कहा कि उनकी मृत्यु के बाद ही उसको पढ़ा जाए।

इल्लतुतमिश का वजीर ताजुद्दीन सुल्तान के इस फैसले से संतुष्ट नहीं था, परंतु वह समझ गया कि सुल्तान ने मन में राजिया को उत्तराधिकारी बनाने की ठान ली है, तो वह किसी की भी बात नहीं मानेंगे, क्योंकि सुल्तान जो एक बार ठान लेते हैं ,करके ही मानते हैं।

29 अप्रैल 1236 ई. के गुलाम वंश के सुल्तान इल्लतुतमिश की मृत्यु हो गई। मृत्यु के बाद जब उनका वसीयतनामा पढ़ा गया, तो सभी अमीरों सरदारों ने इसका विरोध किया कि एक स्त्री के अधीन वह लोग काम नहीं कर सकते। उन्हीं अमीरों में एक अल्तुनियां नाम का अमीर था, जो राजिया के प्रति कोमल भावनाओं रखता था। धर्म का वास्ता देकर जब अमीर सरदार एक स्त्री को अपना शासक मानने से इनकार करने लगे, तब राजिया ने कूटनीति से काम लिया। उन्होंने उन लोगों की आज्ञा का सम्मान किया और अपने भाई रूकुनुद्दीन फ़ीरोज़ को गद्दी पर बैठाया। वह जानती थी कि नाकाबिल रूकुनुद्दीन को एक दिन माता खानी ही पड़ेगी।

अल्तुनियां तो राजिया का विश्वासपात्र था ही उसने याकूत जो कि एक वफादार गुलाम था, उसको भी अपने विश्वास में लेकर राज्य के गुप्तचर विभाग का कार्य सौंप दिया और अपनी सुरक्षा का भार भी याकूत के ऊपर डाल दिया। उधर रूकुनुद्दीन को जब राज्य मिल गया, तो वाह राजकाज छोड़कर रास रंग में चूर रहने लगा। राजिया की सौतेली मां शाह तुर्कोन हमेशा से ही इस बात से शंकित रहती थी कि कहीं अपनी बुद्धिमानी और समझदारी से राजिया गद्दी न हथिया ले, हो वह राजिया को खत्म करने का षड्यन्त्र रचा करती थी। याकूत उन सबकी खबर राजिया को देता था।

रानी दुर्गावती कौन थी ,और उनका इतिहास !

टिप्पणी पोस्ट करें (0)
नया पेज पुराने