भारत की वीर नारियां का इतिहास ‌। bharat ki veer nariya history in hindi

यह हमारे देश के वीर नारियां की जीवन झांकियां है, जिन्हें छोटे एवं किशोरों के लिए सजाया संवारा गया है, ताकि उन्हें पढ़कर उनके जैसी वीर, साहसी और निडर की प्ररेणा जाग सके। वीर नारियों के ये जीवन प्रसंग बहुत सरल भाषा में और रोचक कहानियों के रूप में लिखें गये हैं, ताकि आपको आसानी से याद हो सके। सभी जीवन कथाओं में रेखा चित्र और अंत में एक प्रश्नोत्तरी दी गई है, ताकि आपकी परीक्षा खुद ले सके।


भारत की वीर नारियां का इतिहास ‌। bharat ki veer nariya history in hindi


इस देश की धरती पर सदा से ही महान वीर नारियां जन्म लेती रही है, ताकि उनकी गौरव गाथाएं पढ़कर हमारे अगली पीढ़ी हमेशा उनके कर्मों पर चलकर नई मिसाल खड़ी कर सके इनमें से कुछ है_ पन्नाधाय, हाड़ी रानी, चेनम्मा, दुर्गावती, रजिया सुल्तान, पद्मिनी, साहब कुंवारी, चांद बीबी, लक्ष्मीबाई और जीजाबाई, जिनकी वीर गाथाए युगों युगों तक अमर रहेगी।


झांसी की रानी का इतिहास (हिंदी में)। jhansi rani lakshmi bai history




महाराष्ट्र प्रदेश में कृष्णा नदी के तट पर बाई नामक ग्राम में सतारा नगर के पास 16 नवंबर 1835 को यहां एक कन्या का जन्म हुआ, जिसका नाम मनुबाई रखा गया। मोरोपन्त बाजीराव पेशवा के भाई अप्पा साहेब के पास काम करते थे। अप्पा साहेब बहुत भले पुरुष थे। अप्पा साहेब की मृत्यु के बाद मोरोपन्त जी बाजीराव पेशवा के पास आ गए। बाजीराव पेशवा की कोई संतान नहीं थी, इसीलिए उन्होंने दो पुत्र गोद लिया। एक नाना साहब दूसरे राय साहब। मनु बाई उन्ही दोनों पुत्रों के साथ पढ़ने लिखने जाने लगी। उनका बचपन उन्हीं लोगों के साथ बीतने लगा।


रानी दुर्गावती कौन थी , और उनका इतिहास !




महोबा के राजा को एक कन्या रत्न की प्राप्ति हुई। उसका नाम दुर्गावती रखा गया। सन 1530 में जन्मी दुर्गावती वीर कन्या थी। बहुत सुंदर सुशील और गुणवती थी, साथ ही शिकार खेलने, घोड़े की सवारी करने, तीर तलवार चलाना और वीरतापूर्ण कहानियां सुनने की शौकीन थी। अपने पिता के साथ शासन कार्य देखने के कारण वह राजनीति में भी निपुण थीं।


धीरे धीरे अपने गुणों से सबको प्रभावित करती हुई दुर्गावती भरी हुई और गोंडवाना के राजा दलपति शाह की वीरता से प्रभावित हो गई। विवाह योग्य आयू हो जाने की वजह से उनके पिता मालवा नरेश उनके विवाह के लिए परेशान रहने लगे। वह चाहते थे की राजपूताने का कोई राजकुमार उनकी बेटी से विवाह करें।


हाड़ी रानी का इतिहास । hadi rani history in hindi.




जिस समय भारत पर औरंगजेब का राज था, उस समय रूप नगर की राजकुमारी रूपवती की खूबसूरती के चर्चे फैला हुए थे। औरंगजेब उसे पाने के लिए व्याकुल हो उठे। रूपवती परेशान हो गई कि एक यवन राजा उस पर गलत नजर डाले, यह उसके लिए शर्म की बात होगी। अतः उसने उदयपुर के महाराणा राज सिंह के पास पत्र भेजकर विनती की कि वह अपने मन मैं उनको वर मान चुकी है और औरंगजेब उसको अपने पास रखना चाहता है। यह पढ़कर राजा अपनी सेना लेकर औरंगजेब से लड़ने के लिए बेचैन हो गए।


वीरमाता जीजाबाई माहान्ता भरी इतिहास। Veermata Jijabai Mahanta history in Hindi




जीजा बाई का जन्म सन 1630 में सिंघखेड़ा के राजा लखुजी के घर में हुआ था। लखुजी को अहमद नगर के सुल्तान की और से राजा की उपाधि प्राप्त थी। वैसे वह बहुत बड़े ज़मींदार थे। सुल्तान के दरबार में उनका बहुत आदर सम्मान था।


जीजाबाई बचपन से ही बड़ी निडर थी। स्वभाव से चंचल होने पर भी वह अपने इरादों की पक्की थी। बड़ी समझदारी से हर काम करती थी। वह देवी भवानी की सच्ची भक्त थीं। जीजाबाई का विवाह तभी तय हो गया था, जब वह सिर्फ चार साल की थी। लखुजी के घर में उत्सव था। उसमें भालो जी अपने पुत्र के साथ, जिसका नाम शाहजी था वहां आए थे। दोनों की माता पिता को शाहजी तथा जीजाबाई की जोड़ी जांच गई। भालो जी तथा लखुजी ने सबके सामने जीजाबाई तथा शाहजी की शादी पक्की कर दी।


रजिया सुल्तान कौन थी, जीवन परिचय । Who was Razia Sultan, life introduction in Hindi




भारत में उस समय सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक था।जिसकी मृत्यु 1210 मैं लोहार में चौगान खेलते हुई औरों से गिरने की वजह से हुई। उसकी मृत्यु के बाद उसके बेटे आरामशाह को राजगद्दी मिली। वह अनेक बुरी आदतों का शिकार और अत्याचारी शासक था। उसमें शासन करने की क्षमता भी नहीं था। इसलिए कुछ शासकों ने उसे अपना बादशाह मानने से इन्कार कर दिया।वह योग्य शासक नहीं था। सभी शक्तिशाली शासकों तथा सरदारों ने कुतुबुद्दीन ऐबक के दामाद इल्लतुतमिश को बुलाकर अपना इरादा बताया कि वे सभी उसे दिल्ली का सुल्तान बन्ना चाहते हैं।इल्लतुतमिश तैयार हो गए। और उन्होंने आरामशाह से युद्ध की घोषणा कर दी।


रानी चेनम्मा का इतिहास। Kittur Chennamma Rani history in Hindi




कर्नाटक प्रांत का एक छोटा सा कस्बा है चित्तूर। यह धारवाड़ और बेलगांव के बीच है। बहा राजा मल्लसर्च का शासन था। राजा बहुत वीर और शिकार के शौकीन थे। ककाति में एक बाघ का बहुत आतंक मचा था। उस नरभक्षी बाघ से जनता परेशान थी। जब राजा को उस बाघ के आतंक की खबर मिली, तो राजा उस बाघ का शिकार करने ककाति गए। राजा ने बाघ देखा और उस पर तीर चला दिया और बाघ वही पर ढेर हो गया। राजा को बहुत खुशी हुई, परंतु जब वह बाघ के पास पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि बाघ उनके तीर से नहीं, बल्कि किसी और के तीर से मरा है। उसके एक नहीं दो तीर लगे थे। राजा ने सोचने लगे कि मैंने तो केबल एक ही तीर चलाया था, फिर यह दूसरा बाण किसका था।


चांदबीबी का इतिहास । Chand bibi history in hindi




अहमदनगर के सुल्तान की बेटी का नाम चांद बीबी था। वह अपने पिता की इकलौती संतान थी। उस समय दिल्ली पर बादशाह अकबर का राज्य था। चांद बीबी बहुत कुशल थी और कला में रूचि रखती थी। संगीत में तो वह अति निपुण थी। वीणा पर जब उनके हाथ थिरकते , तो मुग्ध कर देने वाले सुरों को फैला देते थे। उन्हें मराठी, अरबी तथा फारसी आदि भाषाओं का अच्छा ज्ञान था। उनका विवाह आदिलशाह से हुआ था, जो बीजापुर के गद्दी पर बैठते थे। चांद बेबी के समान पत्नी पाकर वह अपने को भाग्यशाली समझते थे। चांद बीबी गुणों की खान थी। उनके पति उन्हें बहुत प्यार करते थे। चांद बीबी अपने पति का बहुत सम्मान करती थी, पति भी उनके सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ते थे।



पन्ना धाय की कहानी | panna dhai kahani, story in hindi




मेवाड़ में महाराणा संग्राम सिंह का राज था। वह हमेशा जनता का भला चाहने वाले प्रतापी राजा थे। उनके बड़े पुत्र का नाम विक्रमादित्य था। वह अनेक बुरी आदतों का शिकार था। उसमें पिता का एक भी गुण नहीं था। वह बड़ा ही अत्याचारी भी था।


पन्ना धाय का त्याग की कहानी | panna dhai kahani, story in hindi


पन्नाधाय की इसमें सभी टॉपिक है , आइए जानते हैं


  • पन्नाधाय कौन थी
  • पन्नाधाय की कथा
  • पन्नाधाय उदयसिंह की कथा
  • महाराणा उदय सिंह के कितने भाई थे?
  • उदय सिंह के पिता कौन थे?
  • उदय सिंह किसका पुत्र था?
  • पन्नाधाय इतिहास में क्यों प्रसिद्ध है


महाराणा संग्राम सिंह का बहुत ही कम उम्र में देहांत हो गया था। उनके बाद उनका पुत्र विक्रमादित्य राज्य संभालने लगा, परंतु उसे प्रजा अपना राजा मानने को तैयार नहीं थी, क्योंकि वह बहुत जालिम था। अन्त प्रजा ने उसे गद्दी से उतरवा के ही दम लिया। तब उसके छोटे भाई उदयसिंह को राजा बनाया गया। उस समय उदयसिंह की उम्र सिर्फ 6 साल की । देखभाल के लिए पन्ना नामक युवती को रखा गया।


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राजकुमारी रत्नावती : जैसलमेर नरेश महारावल रत्नसिंह ने जैसलमेर किले की रक्षा अपनी पुत्री रत्नावती को सौंप दी थी। इसी दौरान दिल्ली के बादशाह अलाउद्दीन की सेना ने किले को घेर लिया जिसका सेनापति मलिक काफूर था। किले के चारों ओर मुगल सेना ने घेरा डाल लिया किंतु राजकुमारी रत्नावती इससे घबराईं नहीं और सैनिक वेश में घोड़े पर बैठी किले के बुर्जों व अन्य स्थानों पर घूम-घूमकर सेना का संचालन करती रहीं। अतत: उसने सेनापति काफूर सहित 100 सैनिकों को बंधक बना लिया।


सेनापति के पकड़े जाने पर मुगल सेना ने किले को घेर लिया। किले के भीतर का अन्न समाप्त होने लगा। राजपूत सैनिक उपवास करने लगे। रत्नावती भूख से दुर्बल होकर पीली पड़ गईं किंतु ऐसे संकट में भी राजकुमारी रत्नावती द्वारा राजधर्म का पालन करते हुए अपने सैनिकों को रोज एक मुट्ठी और मुगल बंदियों को दो मुट्ठी अन्न रोज दिया जाता रहा।


अगले पन्ने पर नौवीं महारानी...


वीर बाला चम्पा : महाराणा प्रताप वन-वन भटक रहे थे किंतु उन्होंने मुगलों के सामने झुकना मंजूर नहीं किया। महाराणा के साथ उनके बच्चों को दिन-रात पैदल चलना पड़ता था। बच्चों को उपवास भी करना पड़ता था। 3-3, 4-4 दिन जंगली बेर व घास की रोटियों पर निकल जाते।


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